लघुसिद्धान्तकौमुदी · वरदराज
1.3.91
द्युद्भ्यो लुङि
लघुसिद्धान्तकौमुदी 536 · प्रकरण 12, which opens at लः कर्मणि च भावे चाकर्मकेभ्यः · rule 166 of 179 in it
No note has been written for this rule yet.
वरदराज writes under it
द्युतादिभ्यो लुङः परस्मैपदं वा स्यात् । पुषादीत्यङ् । अद्युतत्, अद्योतिष्ट । अद्योतिष्यत ॥ एवं ॥ {$ {! 5 श्विता !} वर्णे $} (धातुपाठे <{01.0843}>) ॥ {$ {! 6 ञिमिदा !} स्नेहने $} (धातुपाठे <{01.0844}>) ॥ {$ {! 7 ञिष्विदा !} स्नेहनमोचनयोः $} (धातुपाठे <{01.0845}>) ॥ मोहनयोरित्येके ॥ ञिक्ष्विदा चेत्येके $} ॥ {$ {! 8 रुच !} दीप्तावभिप्रीतौ च $} (धातुपाठे <{01.0847}>)॥ {$ {! 9 घुट !} परिवर्तने $} (धातुपाठे <{01.0848}>)॥ {$ {! 10 शुभ !} दीप्तौ $} (धातुपाठे <{01.0853}>) ॥ {$ {! 11 क्षुभ !} संचलने $} (धातुपाठे <{01.0854}>)॥ {$ {! 12-13 णभ तुभ !} हिंसायाम् $} (धातुपाठे <{01.0855}>) (धातुपाठे <{01.0856}>)॥ {$ {! 14-15-16 स्रंसु भ्रंसु ध्वंसु !} अवस्रंसने $} (धातुपाठे <{01.0857}>) (धातुपाठे <{01.0859}>) (धातुपाठे <{01.0858}>)॥ ध्वंसु गतौ च ॥ {$ {! 17 स्रम्भु !} विश्वासे $} (धातुपाठे <{01.0861}>)॥ {$ {! 18 वृतु !} वर्तने $} (धातुपाठे <{01.0862}>)॥ तर्तते । ववृते । वर्तिता ॥
uncheckedashtadhyayi.com (prakriyā)
This corpus carries no example of the rule. Meghadūta is one poem of 120 verses, and most of the abridgement reaches none of it.