मेघदूतम् · कालिदास · 1.13

मेघदूतम् · कालिदास · 1.13

रामगिरि · the route asked for

मार्गं तावच्छृणु कथयतस्त्वत्प्रयाणानुरूपं

मा
र्गं
ता
व
च्छृ
णु
क
थ
य
त
स्त्व
त्प्र
या
णा
नु
रू
पं

संदेशं मे तदनु जलद श्रोष्यसि श्रोत्रपेयम्

सं
दे
शं
मे
त
द
नु
ज
ल
द
श्रो
ष्य
सि
श्रो
त्र
पे
यम्

खिन्नः खिन्नः शिखरिषु पदं न्यस्य गन्तासि यत्र

खि
न्नः
खि
न्नः
शि
ख
रि
षु
प
दं
न्य
स्य
ग
न्ता
सि
य
त्र

क्षीणः क्षीणः परिलघु पयः स्रोतसां चोपभुज्य

क्षी
णः
क्षी
णः
प
रि
ल
घु
प
यः
स्रो
त
सां
चो
प
भु
ज्य