मेघदूतम् · कालिदास · 1.21

मेघदूतम् · कालिदास · 1.21

पथि · the deer that point the road

नीपं दृष्ट्वा हरितकपिशं केसरैरर्धरूढैः

नी
पं
दृ
ष्ट्वा
ह
रि
त
क
पि
शं
के
स
रै
र
र्ध
रू
ढैः

आविर्भूतप्रथममुकुलाः कन्दलीश्चानुकच्छम्

आ
वि
र्भू
त
प्र
थ
म
मु
कु
लाः
क
न्द
ली
श्चा
नु
क
च्छम्

जग्ध्वाऽरण्येष्वधिकसुरभिं गन्धमाघ्राय चोर्व्याः

ज
ग्ध्वा
ऽर
ण्ये
ष्व
धि
क
सु
र
भिं
ग
न्ध
मा
घ्रा
य
चो
र्व्याः

सारङ्गास्ते जललवमुचः सूचयिष्यन्ति मार्गम्

सा
र
ङ्गा
स्ते
ज
ल
ल
व
मु
चः
सू
च
यि
ष्य
न्ति
मा
र्गम्