मेघदूतम् · कालिदास · 1.25

मेघदूतम् · कालिदास · 1.25

नीचैराख्य · the hill of stone chambers

नीचैराख्यं गिरिमधिवसेस्तत्र विश्रामहेतोः

नी
चै
रा
ख्यं
गि
रि
म
धि
व
से
स्त
त्र
वि
श्रा
म
हे
तोः

त्वत्सम्पर्कात् पुलकितमिव प्रौढपुष्पैः कदम्बैः

त्व
त्स
म्प
र्का
त्पु
ल
कि
त
मि
व
प्रौ
ढ
पु
ष्पैः
क
द
म्बैः

यः पण्यस्त्रीरतिपरिमलोद्गारिभिर्नागराणां

यः
प
ण्य
स्त्री
र
ति
प
रि
म
लो
द्गा
रि
भि
र्ना
ग
रा
णां

उद्दामानि प्रथयति शिलावेश्मभिर्यौवनानि

उ
द्दा
मा
नि
प्र
थ
य
ति
शि
ला
वे
श्म
भि
र्यौ
व
ना
नि