मेघदूतम् · कालिदास · 1.52

मेघदूतम् · कालिदास · 1.52

कनखल · the Gaṅgā come down from the mountain

तस्माद्गच्छेरनुकनखलं शैलराजावतीर्णां

त
स्मा
द्ग
च्छे
र
नु
क
न
ख
लं
शै
ल
रा
जा
व
ती
र्णां

जह्नोः कन्यां सगरतनयस्वर्गसोपानपङ्क्तिम्

ज
ह्नोः
क
न्यां
स
ग
र
त
न
य
स्व
र्ग
सो
पा
न
प
ङ्क्तिम्

गौरीवक्त्रभ्रुकुटिरचनां या विहस्येव फेनैः

गौ
री
व
क्त्र
भ्रु
कु
टि
र
च
नां
या
वि
ह
स्ये
व
फे
नैः

शंभोः केशग्रहणमकरोदिन्दुलग्नोर्मिहस्ता

शं
भोः
के
श
ग्र
ह
ण
म
क
रो
दि
न्दु
ल
ग्नो
र्मि
ह
स्ता