मेघदूतम् · कालिदास · 2.19

मेघदूतम् · कालिदास · 2.19

यक्षगृह · the perch, and the peacock made to dance

तन्मध्ये च स्फटिकफलका काञ्चनी वासयष्टिः

त
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ष्टिः

मूले बद्धा मणिभिरनतिप्रौढवंशप्रकाशैः

मू
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तालैः शिञ्जावलयसुभगैर्नर्तितः कान्तया मे

ता
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ञ्जा
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र्ति
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या
मे

यामध्यास्ते दिवसविगमे नीलकण्ठः सुहृद्वः

या
म
ध्या
स्ते
दि
व
स
वि
ग
मे
नी
ल
क
ण्ठः
सु
हृ
द्वः