मेघदूतम् · कालिदास · 2.32

मेघदूतम् · कालिदास · 2.32

विरहशयन · the one braid, to be undone at the end

आद्ये बद्धा विरहदिवसे या शिखा दाम हित्वा

आ
द्ये
ब
द्धा
वि
र
ह
दि
व
से
या
शि
खा
दा
म
हि
त्वा

शापस्यान्ते विगलितशुचा तां मयोद्वेष्टनीयाम्

शा
प
स्या
न्ते
वि
ग
लि
त
शु
चा
तां
म
यो
द्वे
ष्ट
नी
याम्

स्पर्शक्लिष्टामयमितनखेनासकृत् सारयन्तीं

स्प
र्श
क्लि
ष्टा
म
य
मि
त
न
खे
ना
स
कृ
त्सा
र
य
न्तीं

गण्डाभोगात् कठिनविषमामेकवेणीं करेण

ग
ण्डा
भो
गा
त्क
ठि
न
वि
ष
मा
मे
क
वे
णीं
क
रे
ण