मेघदूतम् · कालिदास · 2.39

मेघदूतम् · कालिदास · 2.39

संदेश · what to say first

भर्तुर्मित्रं प्रियमविधवे विद्धि मामम्बुवाहं

भ
र्तु
र्मि
त्रं
प्रि
य
म
वि
ध
वे
वि
द्धि
मा
म
म्बु
वा
हं

तत्संदेशैर्हृदयनिहितैरागतं त्वत्समीपम्

त
त्सं
दे
शै
र्हृ
द
य
नि
हि
तै
रा
ग
तं
त्व
त्स
मी
पम्

यो वृन्दानि त्वरयति पथि श्राम्यतां प्रोषितानां

यो
वृ
न्दा
नि
त्व
र
य
ति
प
थि
श्रा
म्य
तां
प्रो
षि
ता
नां

मन्द्रस्निग्धैर्ध्वनिभिरबलावेणिमोक्षोत्सुकानि

म
न्द्र
स्नि
ग्धै
र्ध्व
नि
भि
र
ब
ला
वे
णि
मो
क्षो
त्सु
का
नि