मेघदूतम् · कालिदास · 2.7

मेघदूतम् · कालिदास · 2.7

अलका · the jewel lamps a thrown handful cannot put out

नीवीबन्धोच्छ्वसितशिथिलं यत्र बिम्बाधराणां

नी
वी
ब
न्धो
च्छ्व
सि
त
शि
थि
लं
य
त्र
बि
म्बा
ध
रा
णां

क्षौमं रागादनिभृतकरेष्वाक्षिपत्सु प्रियेषु

क्षौ
मं
रा
गा
द
नि
भृ
त
क
रे
ष्वा
क्षि
प
त्सु
प्रि
ये
षु

अर्चिस्तुङ्गानभिमुखमपि प्राप्य रत्नप्रदीपान्

अ
र्चि
स्तु
ङ्गा
न
भि
मु
ख
म
पि
प्रा
प्य
र
त्न
प्र
दी
पान्

ह्रीमूढानां भवति विफलप्रेरणा चूर्णमुष्टिः

ह्री
मू
ढा
नां
भ
व
ति
वि
फ
ल
प्रे
र
णा
चू
र्ण
मु
ष्टिः